36>|| ★★ बहुत जरूरी सत्य वचन★★
|| सत्य वचन ||
इस दुनिया में लगभग सभी लोग संशय तथा संदेह और असंशय तथा निःसंदेह के बीच तनाव के कारण बेचैन रहते हैं।
संदेह से हमेशा बेचैनी, असंतोष, सदा दुःख, अज्ञानता उत्पन्न होती है।
और निःसंदेह से शांति, संतोष, सच्चा खुश,
शाश्वत ज्ञान प्राप्त होता है।
<-----आद्यनाथ राय चौधरी---->
【【【|| সংশয় এবং অসংশয় ||
এ-জগতে সংশয় ও অসংশয় ,তথা
সন্দেহ ও নিঃসন্দেহর টানাপোড়েনে প্রায় সব মানুষের মন দোলায়িত হয়।
সংশয় থেকে আসে অশান্তি, অতৃপ্ত , দুঃখ, চির অজ্ঞান;
আর অসংশয় থেকে আসে শান্তি,তৃপ্তি ও সুখ, প্রকৃত জ্ঞান।】】】
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थोड़ा ध्यान से पड़े।
संभव होतो सोम बार करे ।
प्रत्येक सोमवार करे तो बहुत अच्छे।
21 सोमवार करे तो और अच्छे।
मै तो बोलेंगे लगातार 21 सोमवार करे।
फिर 21 दिन बाद ।(21 days off)
फिर 21 दिन पाठ करे।(again 21 days pray)
बहुत इंपॉर्टेंट तीन मंत्र बहुत सावधानी से
निर्देश अनुसार जप करना है।
इस मंत्र कोई ना देखे, ना कोई सुने।
ऐसे तो हर किताब में इस मंत्र लिखे हुए है।
किंतु इस लिखको कोई ना देखे नहीं मंत्र पाठ करते कोई ना सुने।
प्रत्येक मंत्र की शक्ति अलग अलग।
अतः एकसाथ में तीन मंत्र नहीं करना है।
प्रत्येक मंत्र 21बार करनेकी अंत में एकबार प्रार्थना करना है।
★★ॐ हनुमते नमः।
★★ॐ हं हनुमते नमः।
★★ॐ श्री बज्र हनुमते नमः।
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★★"ॐ हनुमते नमः।" इस मंत्र की 21 बार जप के बाद में एक बार :----
प्रार्थना करे::----
ॐ नमो हनुमते रुद्रावताराय
सर्व शत्रु संहारणाय,
सर्व रोग हराय,
सर्व वशीकरणाय,
राम दूताय स्वाहा।
एक बार इस प्रार्थना की अंत में थोड़ा भाखड़ा सिंदूर हनुमानजिकी चरण में अर्पित करे(हनुमान जीकी फोटो होनेसेभी कोई दिक्कत नहीं)
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★★"ॐ हं हनुमते नमः।" इस मंत्र की भी
21 बार जप के बाद में एक बार :----
प्रार्थना करे::----
ॐ नमो हनुमते रुद्रावताराय
सर्व शत्रु संहारणाय,
सर्व रोग हराय,
सर्व वशीकरणाय,
राम दूताय स्वाहा।
एक बार इस प्रार्थना की अंत में थोड़ा भाखड़ा सिंदूर हनुमानजिकी चरण में अर्पित करे(हनुमान जीकी फोटो होनेसेभी कोई दिक्कत नहीं)
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★★"ॐ श्री बज्र हनुमते नमः।"
इस मंत्र की भी 21 बार जप के बाद में एक बार :----
प्रार्थना करे::
ॐ नमो हनुमते रुद्रावताराय
सर्व शत्रु संहारणाय,
सर्व रोग हराय,
सर्व वशीकरणाय,
राम दूताय स्वाहा।
एक बार इस प्रार्थना की अंत में थोड़ा भाखड़ा सिंदूर हनुमानजिकी चरण में अर्पित करे(हनुमान जीकी फोटो होनेसेभी कोई दिक्कत नहीं)
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मंत्र जप 21x 3
एवं प्रार्थना तीन बार होंगे।
सारे मंत्र पाठ एवं प्रार्थना की अंत में हनुमान जी की चरण से उस भाखड़ा सिंदूर की टीका लीजिए। घर की सभीको सिंदूर की टीका दीजिए।
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Every day morning
पूर्व तरफ मुंह करके इस प्रार्थना प्रत्येक दिन करे।
ऐसा तो ----
महा रोग शोक तथा सर्व पाप से मुक्ति के लिए
प्रति सोमवार दिन जप करना उचित।
मै तो बोलूं कि प्रत्येक दिन करे----
आशुतोष शशाँक शेखर,
चन्द्र मौली चिदंबरा,
कोटि कोटि प्रणाम शम्भू,
कोटि नमन दिगम्बरा ॥
निर्विकार ओमकार अविनाशी,
तुम्ही देवाधि देव,
जगत सर्जक प्रलय करता,
शिवम सत्यम सुंदरा ॥
निरंकार स्वरूप कालेश्वर,
महा योगीश्वरा,
दयानिधि दानिश्वर जय,
जटाधार अभयंकरा ॥
शूल पानी त्रिशूल धारी,
औगड़ी बाघम्बरी,
जय महेश त्रिलोचनाय,
विश्वनाथ विशम्भरा ॥
नाथ नागेश्वर हरो हर,
पाप साप अभिशाप तम,
महादेव महान भोले,
सदा शिव शिव संकरा ॥
जगत पति अनुरकती भक्ति,
सदैव तेरे चरण हो,
क्षमा हो अपराध सब,
जय जयति जगदीश्वरा ॥
जनम जीवन जगत का,
संताप ताप मिटे सभी,
ओम नमः शिवाय मन,
जपता रहे पञ्चाक्षरा ॥
आशुतोष शशाँक शेखर,
चन्द्र मौली चिदंबरा,
कोटि कोटि प्रणाम शम्भू,
कोटि नमन दिगम्बरा ॥
कोटि नमन दिगम्बरा..
कोटि नमन दिगम्बरा..
कोटि नमन दिगम्बरा..
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मंगलम भगवान् विष्णु
मंगलम गरुड़ध्वजः ||
मंगलम पुन्डरी काक्षो
मंगलायतनो हरि ||
सर्व मंगल मांग्लयै शिवे सर्वार्थ साधिके |
शरण्ये त्रयम्बके गौरी नारायणी नमोस्तुते ||
त्वमेव माता च पिता त्वमेव,
त्वमेव बंधू च सखा त्वमेव,
त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव,
त्वमेव सर्वं मम देव देव ||
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अगर आप मेरा इस निर्देश ठीक ठाक पालन करने में समर्थ हुआ तथा
निर्देश अनुसार मंत्र पाठ,प्रार्थना करे सके तो
मै उम्मीद करते है कि आपकी सारे बाधाएं दूर होंगे एवं सारे काम अच्छे से सम्पन्न होंगे,
आगे की बहुत काम आप आरामसे करनेमे समर्थ होंगे।
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